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लड़का खोलना चाहता था शहर मे कबाड़ी की दुकान पर हुआ कुछ ऐसा की बन गया मशहूर IAS अफ़सर!

आपने प्रशासन, कला, खेल, राजनीति, शिक्षा सहित हर क्षेत्र में अप्रतिम उपलब्धि हासिल किए व्यक्तियों की प्रेरणादायक कहानियां और उनके संघर्षपूर्ण जीवन के बारे में ज़रूर सुना होगा। हर क्षेत्र में ऐसे लोग मिल जायेंगे, जिन्होंने अपने सफलता के सफर में हर चुनौतियों से पार पाते हुए परिवार और समाज का नाम रौशन किया। सचिन तेंदुलकर, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, धीरुभाई अंबानी, अक्षय कुमार, टीवी सिंधु, आदि अनेकों उदाहरण हैं। लेकिन आज आपको एक ऐसे आईएएस अधिकारी के सफ़र के बारे में बताएंगे, जिन्होंने प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना भी नहीं देखा था। लेकिन जिंदगी ऐसे मोड़ पर ले आई और उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में अच्छा स्थान प्राप्त कर परिवार और समाज का नाम रौशन किया। उस व्यक्ति का नाम है- दीपक रावत।

1977 में उत्तराखंड के मसूरी में जन्मे आईएएस अधिकारी दीपक रावत अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। उनकी गिनती देश के तेजतर्रार अफसरों में होती है। सोशल मीडिया पर उनकी तगड़ी फैन फॉलोइंग है। YouTube पर उनके फील्ड विजिट के वीडियोज चर्चा में रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं पढ़ने-लिखने में कमजोर स्टूडेंट रहे IAS दीपक रावत बचपन में एक कबाड़ी बनना चाहते थे।

कबाड़ी का पेशा अच्छा लगता था, कबाड़ी वाला बनने का ही सोचा था

एक बार एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में दीपक ने कहा था कि बचपन में दूसरे बच्चों की तरह उनमें भी काफी उत्सुकता रहती थी। वो डिब्बे, खाली टूथपेस्ट के पैकेट आदि इकट्ठा कर एक दुकान सी लगा लेते थे। जब घर के या पड़ोसी लोग पूछते थे कि आगे चलकर क्या करना है तो उनका जवाब होता था कि कबाड़ीवाला बनना है। इंटरव्यू में दीपक ने बताया कि उन्हें कबाड़ी का व्यवसाय काफी अच्छा लगता था और वह बचपन में खेल खेल में कबाड़ी बनने की नौटंकी भी करते थे।

हासिल की 12वीं रैंक और कबाड़ी बनने की बजाय बन गये आईएएस

दीपक ने कहा, “मुझे कबाड़ीवाले का व्यवसाय बहुत अच्छा लगता था। अलग अलग जगहों पर जाकर अलग अलग चीजों का इकट्ठा करना और फिर उसे बेचना। मुझे खुशी है कि मैं आज आईएएस हूं, लेकिन आज भी उस प्रोफेशन को मिस करता हूं।” दीपक ने जवाहरलाल नेहरू कॉलेज से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन की। दिल्ली में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन लगातार प्रयास और कड़ी मेहनत के बाद भी वे अपने दो प्रयासों में सफलता प्राप्त नहीं कर पाए थे । उसके बाद उन्होंने तीसरा प्रयास करने का निर्णय लिया और उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली।

अपनी मेहनत और लगन से तीसरे प्रयास में उन्होंने ना सिर्फ यह परीक्षा पास की, बल्कि पूरे देश में 12वां स्थान भी हासिल किया। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें मूल कैडर उत्तराखंड सौंपा गया। आज दीपक रावत युवाओं के मोटिवेशनल टिप्स देते रहते हैं और सोशल मीडिया पर उनकी मानसिक एवं अन्य परेशानियों के समाधान खोजने में मदद करते हैं।

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